श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 78-79
 
 
श्लोक  5.160.78-79 
शिखण्डिनमथो ब्रूहि उलूक वचनान्मम।
स्त्रीति मत्वा महाबाहुर्न हनिष्यति कौरव:॥ ७८॥
गाङ्गेयो धन्विनां श्रेष्ठो युद्धॺेदानीं सुनिर्भय:।
कुरु कर्म रणे यत्त: पश्याम: पौरुषं तव॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
‘उल्लू ! इसके बाद तुम शिखण्डी से भी यह कहना कि ‘धनुर्धर, महाबाहु भीष्म, गंगापुत्र और कुरुवंशी भीष्म तुम्हें स्त्री समझकर नहीं मारेंगे; इसलिए अब तुम निर्भय होकर युद्ध करो और युद्धस्थल में बड़े यत्न से अपना पराक्रम दिखाओ। हम तुम्हारा पुरुषार्थ देखेंगे।’॥ 78-79॥
 
‘Owl! After this you must tell this to Shikhandi also – ‘The great-armed Bhishma, son of Ganga and the son of the Kuru dynasty, the best among archers, will not kill you thinking you to be a woman; therefore you must now fight fearlessly and display your valour in the battlefield with great effort. We will see your manliness.’॥ 78-79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)