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mahabharat 5.160.77: रणभूमि में द्रोणाचार्य का सामना करने पर ही तुम जान सकोगे कि तुम्हारा हित किसमें है। आओ, अपने मित्रों के साथ युद्ध करो और गुरुवध का महाकठोर पाप करो।॥77॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  5.160.77 
द्रोणमासाद्य समरे ज्ञास्यसे हितमुत्तमम्।
युध्यस्व ससुहृत् पापं कुरु कर्म सुदुष्करम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में द्रोणाचार्य का सामना करने पर ही तुम जान सकोगे कि तुम्हारा हित किसमें है। आओ, अपने मित्रों के साथ युद्ध करो और गुरुवध का महाकठोर पाप करो।॥77॥
 
‘Only when you face Dronacharya on the battlefield will you be able to know what is in your best interest. Come, fight with your friends and commit the most difficult sin of killing your teacher.’॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)