धृष्टद्युम्नं च पाञ्चाल्यं ब्रूयास्त्वं वचनान्मम।
एष ते समय: प्राप्तो लब्धव्यश्च त्वयापि स:॥ ७६॥
अनुवाद
फिर मेरा यह सन्देश पांचाल के राजकुमार धृष्टद्युम्न को भी दे दो - 'राजकुमार! यही तुम्हारे लिए उचित समय है। तुम आचार्य द्रोण को अपने सामने पाओगे।' 76.
‘Then convey this message of mine to the prince of Panchala, Dhrishtadyumna as well - ‘Prince! This is the right time for you. You will find Acharya Drona in front of you.' 76.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥