श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  5.160.76 
धृष्टद्युम्नं च पाञ्चाल्यं ब्रूयास्त्वं वचनान्मम।
एष ते समय: प्राप्तो लब्धव्यश्च त्वयापि स:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
फिर मेरा यह सन्देश पांचाल के राजकुमार धृष्टद्युम्न को भी दे दो - 'राजकुमार! यही तुम्हारे लिए उचित समय है। तुम आचार्य द्रोण को अपने सामने पाओगे।' 76.
 
‘Then convey this message of mine to the prince of Panchala, Dhrishtadyumna as well - ‘Prince! This is the right time for you. You will find Acharya Drona in front of you.' 76.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)