श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 64-66h
 
 
श्लोक  5.160.64-66h 
तं च तूबरकं बालं बह्वाशिनमविद्यकम्॥ ६४॥
उलूक मद्वचो ब्रूहि असकृद्भीमसेनकम्।
विराटनगरे पार्थ यस्त्वं सूदो ह्यभू: पुरा॥ ६५॥
बल्लवो नाम विख्यातस्तन्ममैव हि पौरुषम्।
 
 
अनुवाद
हे उल्लू! उस मूँछ रहित (या बोझ ढोने वाले बैल) पुरुष, अतिभक्षक, अज्ञानी और मूर्ख भीमसेन को मेरा यह सन्देश बार-बार सुनाओ कि 'कुन्तीकुमार! तुम पहले विराटनगर में रसोइये के रूप में रहते थे और बल्लव नाम से प्रसिद्ध हुए, वह सब मेरा ही प्रयत्न था।'
 
O Owl! Convey this message of mine again and again to that man without moustache (or load carrying bull), overeater, ignorant and foolish Bhimasena, 'Kuntikumar! Earlier you lived as a cook in Viratnagar and became famous by the name of Ballava, all of that was my effort. 64-65 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)