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mahabharat 5.160.63-64h: मेरे जैसे राजा के लिए कवच धारण करके युद्धभूमि में जाकर आपसे युद्ध करना किसी भी प्रकार उचित नहीं है, विशेषतः कंस के सेवक से।॥63 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  5.160.63-64h 
मद्विधो नापि नृपतिस्त्वयि युक्त: कथञ्चन॥ ६३॥
संनाहं संयुगे कर्तुं कंसभृत्ये विशेषत:।
 
 
अनुवाद
मेरे जैसे राजा के लिए कवच धारण करके युद्धभूमि में जाकर आपसे युद्ध करना किसी भी प्रकार उचित नहीं है, विशेषतः कंस के सेवक से।॥63 1/2॥
 
‘It is in no way appropriate for a king like me to wear armour and enter the battlefield to fight with you, especially with a servant of Kamsa.’॥ 63 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)