श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 6-8h
 
 
श्लोक  5.160.6-8h 
उलूक गच्छ कैतव्य पाण्डवान् सहसोमकान्॥ ६॥
गत्वा मम वचो ब्रूहि वासुदेवस्य शृण्वत:।
इदं तत् समनुप्राप्तं वर्षपूगाभिचिन्तितम्॥ ७॥
पाण्डवानां कुरूणां च युद्धं लोकभयंकरम्।
 
 
अनुवाद
हे शकुनिपुत्र, हे जुआ खेलने में निपुण उलूक! तुम सोमकों और पाण्डवों के पास जाओ और वहाँ पहुँचकर वसुदेव श्रीकृष्ण की उपस्थिति में उनसे मेरा यह सन्देश कहो - 'कौरवों और पाण्डवों का युद्ध, जिसकी बहुत वर्षों से कल्पना की जा रही थी और जो सम्पूर्ण जगत के लिए अत्यन्त भयंकर है, अब आ पहुँचा है।
 
O Ulooka, son of Shakuni, the expert in gambling, go to the Somakas and the Pandavas and on reaching there convey my message to them in the presence of Vasudev Sri Krishna - 'The war between the Kauravas and the Pandavas, which was being contemplated upon for many years and is extremely dreadful for the whole world, has now arrived. 6-7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)