Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.57: इतना ही नहीं, हम अपने शरीर में अनेक रूप भी प्रकट और प्रदर्शित कर सकते हैं; परंतु इन सब प्रदर्शनों से न तो हमारा अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त होता है और न ही हमारा शत्रु मानवीय बुद्धि अर्थात भय से ही जीता जा सकता है॥ 57॥ | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दर्शयेम च रूपाणि स्वशरीरे बहून्यपि।
न तु पर्यायत: सिद्धिर्बुद्धिमाप्नोति मानुषीम्॥ ५७॥
अनुवाद
इतना ही नहीं, हम अपने शरीर में अनेक रूप भी प्रकट और प्रदर्शित कर सकते हैं; परंतु इन सब प्रदर्शनों से न तो हमारा अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त होता है और न ही हमारा शत्रु मानवीय बुद्धि अर्थात भय से ही जीता जा सकता है॥ 57॥
‘Not only this, we can also manifest and display many forms in our body; but with all these displays neither our desired goal is achieved nor our enemy can be overcome by human wisdom i.e. fear.॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥