Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.55: मन्त्र, माया या भयंकर चालें - ये युद्ध में शस्त्रधारी योद्धा के क्रोध और गर्जना को ही बढ़ाती हैं (उसे डरा नहीं सकतीं)।॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रजालं च माया वै कुहका वापि भीषणा।
आत्तशस्त्रस्य संग्रामे वहन्ति प्रतिगर्जना:॥ ५५॥
अनुवाद
मन्त्र, माया या भयंकर चालें - ये युद्ध में शस्त्रधारी योद्धा के क्रोध और गर्जना को ही बढ़ाती हैं (उसे डरा नहीं सकतीं)।॥ 55॥
Spells, illusions or terrible tricks - these only increase the rage and roar of a warrior armed with weapons in the battle (they cannot frighten him).॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥