श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.160.54 
सभामध्ये च यद् रूपं मायया कृतवानसि।
तत् तथैव पुन: कृत्वा सार्जुनो मामभिद्रव॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तुमने सभा में अपनी माया से भयंकर रूप धारण किया था; अब उसी रूप को प्रकट करके अर्जुन के साथ मुझ पर आक्रमण करो॥54॥
 
You had assumed the fearsome form through your illusion in the court; then manifest that form again and attack me along with Arjuna. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)