श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.160.53 
ब्रूयास्त्वं वासुदेवं च पाण्डवानां समीपत:।
आत्मार्थं पाण्डवार्थं च यत्ता मां प्रति योधय॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे उलूक! तुम पाण्डवों के निकट उपस्थित वसुदेव श्रीकृष्ण से भी कहो - 'जनार्दन! अब तुम अपने तथा पाण्डवों के कल्याण के लिए पूर्ण तत्परता और तैयारी के साथ मेरे साथ युद्ध करो॥ 53॥
 
O Uluka! You should also say to Vasudeva Sri Krishna who is present near the Pandavas - 'Janardan! Now you should fight with me with full readiness and preparation for your own and the Pandavas' welfare. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)