श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.160.48 
त्वत्कृते दुष्टभावस्य संत्यागो विदुरस्य च।
जातुषे च गृहे दाहं स्मर तं पुरुषो भव॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम्हारे लिए ही दुष्टात्मा विदुर का परित्याग किया है। लाक्षागृह में जलाए जाने की घटना को स्मरण करो और अब से मनुष्य बनो।' 48.
 
‘For your sake only I have abandoned the evil soul Vidura. Remember the incident of your being burnt in Lakhshagriha and become a man from now onwards. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)