श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.160.44 
त्यक्त्वा छद्म त्विदं राजन् क्षत्रधर्मं समाश्रित:।
कुरु कार्याणि सर्वाणि धर्मिष्ठोऽसि नरर्षभ॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पुरुषोत्तम! यदि आप धार्मिक हैं तो इन छल-कपट और पाखंड को त्यागकर क्षत्रिय धर्म का पालन कीजिए और उसी के अनुसार सब कुछ कीजिए।॥44॥
 
O King! Best of men! If you are religious then abandon these deceits and hypocrisy and follow the kshatriya dharma and do everything according to it. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)