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mahabharat 5.160.4-6h: राजेंद्र! भरतनन्दन! नरश्रेष्ठ! दुर्योधन ने कर्ण, भाई दु:शासन तथा सुबलपुत्र शकुनि से वार्तालाप तथा परामर्श करके उलूक को एकान्त में बुलाया और उससे इस प्रकार कहा - 4-5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 4-6h
 
 
श्लोक  5.160.4-6h 
तत्र दुर्योधनो राजा कर्णेन सह भारत॥ ४॥
सम्भाषित्वा च कर्णेन भ्रात्रा दु:शासनेन च।
सौबलेन च राजेन्द्र मन्त्रयित्वा नरर्षभ॥ ५॥
आहूयोपह्वरे राजन्नुलूकमिदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! भरतनन्दन! नरश्रेष्ठ! दुर्योधन ने कर्ण, भाई दु:शासन तथा सुबलपुत्र शकुनि से वार्तालाप तथा परामर्श करके उलूक को एकान्त में बुलाया और उससे इस प्रकार कहा - 4-5 1/2॥
 
Rajendra! Bharatnandan! Narashrestha! Duryodhana, after talking and consulting with Karna, brother Dushasan and Subala's son Shakuni, called Uluk privately and said to him thus - 4-5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)