श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.160.37 
अविज्ञानात् तत: सोऽथ डिण्डिकं ह्युपभुक्तवान्।
ततस्ते सहिता: सर्वे मन्त्रयामासुरञ्जसा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
बिल्ली को चूहे की जानकारी नहीं थी। इसलिए उसने डिंडिक भी खा लिया। इसके बाद एक दिन सभी चूहे इकट्ठे हुए और आपस में चर्चा करने लगे। 37.
 
‘The cat was unaware of the mice's awareness. So it ate the dindik as well. Thereafter one day all the mice got together and started discussing among themselves. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)