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mahabharat 5.160.34-35: राजन्! उन चूहों में डिंडिक नाम का एक चूहा सबसे बुद्धिमान था। उसने चूहों के उस विशाल समूह से इस प्रकार कहा - 'तुम सब लोग एक साथ नदी के किनारे चलो। मैं भी अपने चाचा के साथ बाद में वहाँ जाऊँगा।'   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  5.160.34-35 
तत: प्राज्ञतम: कश्चिड्डिण्डिको नाम मूषिक:।
अब्रवीद् वचनं राजन् मूषिकाणां महागणम्॥ ३४॥
गच्छतां वो नदीतीरं सहितानां विशेषत:।
पृष्ठतोऽहं गमिष्यामि सहैव मातुलेन तु॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
राजन्! उन चूहों में डिंडिक नाम का एक चूहा सबसे बुद्धिमान था। उसने चूहों के उस विशाल समूह से इस प्रकार कहा - 'तुम सब लोग एक साथ नदी के किनारे चलो। मैं भी अपने चाचा के साथ बाद में वहाँ जाऊँगा।'
 
‘King! Among those mice, a mouse named Dindik was the most intelligent. He said to that great group of mice in this way – ‘All of you should go together to the bank of the river. I will also go there later with my uncle.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)