श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.160.33 
ततस्ते मूषिका: सर्वे समेत्यान्योऽन्यमब्रुवन्।
मातुलो वर्धते नित्यं वयं क्षीयामहे भृशम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब वे चूहे इकट्ठे होकर आपस में कहने लगे- ‘क्यों! ऐसा क्यों है कि चाचा दिन-प्रतिदिन मोटे और स्वस्थ होते जा रहे हैं और हमारी संख्या तेजी से घटती जा रही है?’॥33॥
 
‘Then those mice got together and started saying to each other- ‘Why! Why is it that uncle is getting fatter and healthier day by day and our number is decreasing rapidly?'॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)