श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.160.19 
पूज्यमानस्तु तै: सर्वै: पक्षिभि: पक्षिभोजन:।
आत्मकार्यं कृतं मेने चर्यायाश्च कृतं फलम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब पक्षियों को अपना आहार बनाने वाले बिल्ली को सब पक्षियों से अधिकाधिक आदर मिलने लगा, तब उसने समझ लिया कि उसका कार्य पूर्ण हो गया और उसे धर्मानुष्ठान का मनोवांछित फल भी मिल गया॥19॥
 
When the cat, who made the birds his food, started receiving more and more respect from all the birds, then he understood that his task was accomplished and he had also got the desired result of the religious observance.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)