श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.160.15 
अत्र ते वर्तयिष्यामि आख्यानमिदमुत्तमम्।
कथितं नारदेनेह पितुर्मम नराधिप॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस विषय में मैं आपसे यह अद्भुत कथा कह रहा हूँ, जो नारद जी ने मेरे पिता से कही थी॥15॥
 
O Lord of men! In this regard I am narrating to you this wonderful story which Narada ji told to my father.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)