श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  5.160.122 
भीष्मवेगमपर्यन्तं द्रोणग्राहदुरासदम्।
कर्णशल्यझषावर्तं काम्बोजवडवामुखम्॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
भीष्म उसका अनन्त वेग हैं, इस युद्धरूपी समुद्र में प्रवेश करना अत्यन्त कठिन है, क्योंकि द्रोणाचार्य व्याधियों का समुद्र हैं, कर्ण और शल्य क्रमशः मत्स्य और भँवर हैं तथा कम्बोजराज सुदक्षिण उसमें प्रचण्ड अग्नि हैं॥122॥
 
Bhishma is its infinite velocity, it is extremely difficult to enter this ocean of war as Dronacharya is the ocean of prey, Karna and Shalya act as the fish and the whirlpool respectively and Kambojaraj Sudakshin is the huge fire in it.॥ 122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)