श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.160.12 
य इच्छसि जगत् सर्वं नश्यमानं नृशंसवत्।
अभयं सर्वभूतेभ्यो दाता त्वमिति मे मति:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैंने तो यह मान लिया था कि आपने समस्त प्राणियों को अभयदान दे दिया है; किन्तु अब आप क्रूर पुरुष की भाँति सम्पूर्ण जगत् का विनाश देखना चाहते हैं॥12॥
 
I believed that you have given protection to all creatures; but now like a cruel person you want to see the destruction of the entire world.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)