श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  5.160.118 
न माया हीन्द्रजालं वा कुहका वापि भीषणा।
आत्तशस्त्रस्य संग्रामे वहन्ति प्रतिगर्जना:॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
माया, जादू या भयंकर भ्रम युद्धस्थल में शस्त्रधारी योद्धा के क्रोध और गर्जना को ही बढ़ाते हैं (वे उसे भयभीत नहीं कर सकते)।॥118॥
 
Maya, magic or a terrible illusion only increase the anger and roar of a warrior armed with weapons in the battle-field (they cannot frighten him).॥ 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)