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mahabharat 5.160.115: हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारे भाई भीमसेन को राजा विराट के रसोईघर में रसोइया बनकर जो कठोर परिश्रम करना पड़ा, वह सब मेरा ही परिश्रम है।'   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.160.115 
सूदकर्मणि विश्रान्तं विराटस्य महानसे।
भीमसेनेन कौन्तेय यत् तु तन्मम पौरुषम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारे भाई भीमसेन को राजा विराट के रसोईघर में रसोइया बनकर जो कठोर परिश्रम करना पड़ा, वह सब मेरा ही परिश्रम है।'
 
O son of Kunti! The hard work that your brother Bhimasena had to do by working as a cook in King Virat's kitchen is all my hard work.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)