श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  5.160.113 
सा वो दास्ये समापन्नान् मोचयामास पार्षती।
अमानुष्यं समापन्नान् दासकर्मण्यवस्थितान्॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
तुम सब अमानवीय अवस्था में थे और दासता की स्थिति में थे। उस समय द्रुपद की पुत्री कृष्णा ने ही तुम सबको दासता के खतरे से बचाया था।
 
‘All of you were in an inhumane condition and were in the state of slavery. At that time, it was Krishna, the daughter of Drupada, who rescued all of you from the danger of slavery.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)