श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  5.160.112 
सगदाद् भीमसेनाद् वा फाल्गुनाद् वा सगाण्डिवात्।
न वै मोक्षस्तदाभूद् वो विना कृष्णामनिन्दिताम्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
गदाधारी भीमसेन या गांडीवधारी अर्जुन भी पतिव्रता द्रौपदी की सहायता के बिना आपको दासत्व से मुक्त नहीं कर सकते।
 
‘Even mace-wielding Bhimasena or Gandiva-wielding Arjuna could not free you from your slavery without the help of the chaste Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)