श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  5.160.110 
त्रयोदश समा भुक्तं राज्यं विलपतस्तव।
भूयश्चैव प्रशासिष्ये त्वां निहत्य सबान्धवम्॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
तू रोती-बिलखती रही और मैंने तेरह वर्ष तक तेरा राज्य भोगा। अब तेरे भाइयों सहित तुझे मारकर मैं आगे भी इसी राज्य पर राज्य करूँगा॥110॥
 
You kept weeping and wailing and I enjoyed your kingdom for thirteen years. Now after killing you along with your brothers, I will rule this kingdom in future too.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)