श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  5.160.109 
न तु पर्यायधर्मेण सिद्धिं प्राप्नोति मानव:।
मनसैवानुकूलानि धातैव कुरुते वशे॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
केवल धार्मिक आचरण से कोई भी मनुष्य सिद्धि प्राप्त नहीं करता; केवल भगवान् ही हैं जो केवल मानसिक संकल्प से ही सबको अपने अधीन और अनुकूल बना लेते हैं॥109॥
 
No human being achieves success by mere religious practices; it is only the Creator who makes everyone subservient and favorable to Himself by a mere mental resolve.॥ 109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)