श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  5.160.104 
नानाजनौघं युधि सम्प्रवृद्धं
गाङ्गं यथा वेगमपारणीयम्।
मां च स्थितं नागबलस्य मध्ये
युयुत्ससे मन्द किमल्पबुद्धे॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
हे अल्पबुद्धि वाले मूर्ख अर्जुन! जिस हाथी की सेना का वेग युद्ध के समय गंगा के वेग के समान बढ़ जाता है और जिसे पार करना असम्भव है, उस सेना के मध्य में खड़े हुए मुझ दुर्योधन के साथ युद्ध करने की तू इच्छा कैसे कर सकता है?॥104॥
 
O foolish Arjuna of little wisdom! How can you desire to fight with me, Duryodhan, standing in the middle of the elephant army, whose speed increases like the speed of the Ganges during the war and which is impossible to cross?॥104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)