को ह्यस्ति जीविताकाङ्क्षी प्राप्येममरिमर्दनम्।
पार्थो वा इतरो वापि कोऽन्य:स्वस्ति गृहान् व्रजेत्॥ १००॥
अनुवाद
अर्जुन हो या कोई अन्य, ऐसा कौन वीर पुरुष है जो जीवित रहने की इच्छा रखता हो, जो युद्ध में शत्रुओं का नाश करने वाले इन आचार्य के पास पहुँचकर सकुशल घर लौट सके?॥100॥
Be it Arjuna or any other person, who is such a brave man who desires to live, who can reach this Acharya who destroys enemies in the war and return home safely?॥ 100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥