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mahabharat 5.16.8: सभी पदार्थ अपने-अपने कारणों में प्रविष्ट होते हैं। अतः तुम भी निर्भय होकर जल में प्रवेश करो। मैं सनातन वैदिक मंत्रों से तुम्हारी सहायता करूँगा। ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.16.8 
स्वयोनिं भजते सर्वो विशस्वापोऽविशङ्कित:।
अहं त्वां वर्धयिष्यामि ब्राह्मैर्मन्त्रै: सनातनै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सभी पदार्थ अपने-अपने कारणों में प्रविष्ट होते हैं। अतः तुम भी निर्भय होकर जल में प्रवेश करो। मैं सनातन वैदिक मंत्रों से तुम्हारी सहायता करूँगा। ॥8॥
 
All substances enter their respective causes. Therefore, you too should enter the water without any fear. I will support you with the eternal Vedic mantras. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)