श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.16.7 
त्वय्यापो निहिता: सर्वास्त्वयि सर्वमिदं जगत्।
न तेऽस्त्यविदितं किंचित् त्रिषु लोकेषु पावक॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पावक! सारा जल आपमें ही संचित है। यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आपमें ही स्थित है। तीनों लोकों में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो आपसे अनभिज्ञ हो॥7॥
 
Pavaka! All the water is stored in you. This entire universe is established in you. There is nothing in the three worlds that is not known to you. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)