श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.16.6 
त्वामग्ने जलदानाहुर्विद्युतश्च मनीषिण:।
दहन्ति सर्वभूतानि त्वत्तो निष्क्रम्य हेतय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे अग्निदेव! बुद्धिमान लोग आपको मेघ और विद्युत कहते हैं। आपसे ही ज्वालाएँ निकलती हैं और समस्त प्राणियों को जला डालती हैं॥6॥
 
O Agnidev! Wise men call you the clouds and electricity. It is from you that flames emerge and burn all living creatures.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)