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श्लोक 5.16.34  |
वैवस्वतं पितॄणां च वरुणं चाप्यपां तथा।
आधिपत्यं ददौ शक्र: संचिन्त्य वरदस्तथा॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| इसी प्रकार बहुत विचार-विमर्श के बाद वरदाता इन्द्र ने पितरों का स्वामित्व वैवस्वत यम को तथा जल का स्वामित्व वरुण को दे दिया। |
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| Similarly, after much deliberation, the bestower of boons Indra gave the ownership of the ancestors to Vaivasvat Yama and that of water to Varuna. 34. |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्रवरुणादिसंवादे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्रवरुणादिसंवादविषयक
सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥ [दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३४ १/२ श्लोक हैं।] |
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