श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.16.33 
शल्य उवाच
एवं संचिन्त्य भगवान‍् महेन्द्र: पाकशासन:।
कुबेरं सर्वयक्षाणां धनानां च प्रभुं तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
शल्य कहते हैं - हे राजन! ऐसा विचार करके पक्षासन भगवान महेन्द्र ने कुबेर को सम्पूर्ण यक्षों और धन का अधिपति बना दिया॥33॥
 
Shalya says – O king! After thinking like this, Pakshasan Lord Mahendra made Kuber the ruler of all the Yakshas and wealth. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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