श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.16.30 
राजा देवानां नहुषो घोररूप-
स्तत्र साह्यं दीयतां मे भवद्भि:।
ते चाब्रुवन् नहुषो घोररूपो
दृष्टीविषस्तस्य बिभीम ईश॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इन देवताओं के राजा नहुष अत्यंत भयंकर होते जा रहे हैं। कृपया उन्हें स्वर्ग से निकालने में मेरी सहायता कीजिए।' यह सुनकर उन्होंने कहा - 'देवेश्वर! नहुष का रूप अत्यंत भयंकर है। उनकी आँखों में विष है। इसीलिए हम उनसे भयभीत हैं।'
 
The king of these gods, Nahush, is becoming very fearsome. Please help me in removing him from heaven.' Hearing this, they replied - 'Deveshwar! Nahush has a very fearsome appearance. There is poison in his eyes. That is why we are afraid of him. 30.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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