श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.16.3 
कृत्वा तुभ्यं नमो विप्रा: स्वकर्मविजितां गतिम्।
गच्छन्ति सह पत्नीभि: सुतैरपि च शाश्वतीम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आपकी पूजा और प्रार्थना करके ब्राह्मण अपनी स्त्री और पुत्रों सहित अपने कर्मों द्वारा प्राप्त शाश्वत स्वर्गीय सुख को प्राप्त करते हैं॥3॥
 
By worshiping and praying to you the brahmins, along with their wives and sons, attain everlasting heavenly bliss obtained by their deeds. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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