श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.16.28 
ते वै समागम्य महेन्द्रमूचु-
र्दिष्टॺा त्वाष्ट्रो निहतश्चैव वृत्र:।
दिष्टॺा च त्वां कुशलिनमक्षतं च
पश्यामो वै निहतारिं च शक्र॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वे सब देवराज इन्द्र से मिले और बोले- 'शक्र! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुमने त्वष्टा के पुत्र वृत्रासुर का वध कर दिया। शत्रु का वध करने के बाद हम तुम्हें सुरक्षित और सकुशल देख रहे हैं, यह भी बड़े हर्ष की बात है।'॥28॥
 
They all met Devraj Indra and said- 'Sakra! It is a matter of great fortune that you killed Vritrasur, the son of Tvashta. We see you safe and unharmed after killing the enemy, this is also a matter of great joy.'॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)