इन्द्र उवाच
कथं च नहुषो राज्यं देवानां प्राप दुर्लभम्।
तपसा केन वा युक्त: किंवीर्यो वा बृहस्पते॥ २२॥
(तत् सर्वं कथयध्वं मे यथेन्द्रत्वमुपेयिवान्।)
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - बृहस्पति! नहुष ने देवताओं का दुर्लभ राज्य किस प्रकार प्राप्त किया? वह किस तप से संपन्न है? अथवा उसमें कितना बल और पराक्रम है? उसने इन्द्र पद कैसे प्राप्त किया? आप सभी कृपा करके मुझे ये सब बातें बताइए॥ 22॥
Indra said - Brihaspati! How did Nahusha attain the rare kingdom of the gods? What austerity is he endowed with? Or how much strength and valour does he possess? How did he attain the position of Indra? All of you please tell me all these things.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥