श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.16.20 
किं कार्यमवशिष्टं वो हतस्त्वाष्ट्रो महासुर:।
वृत्रश्च सुमहाकायो यो वै लोकाननाशयत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! सम्पूर्ण लोकों का संहार करने वाला त्वष्टकपुत्र महासुर वृत्र मेरे द्वारा मारा गया; अब मैं तुम्हारा कौन-सा कार्य शेष रखूँ? 20॥
 
Brahman! The giant Mahasura Vritra, son of Tvashtaka, who was destroying entire worlds, was killed by me; Now what remaining work should I do for you?' 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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