श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.16.18 
पाहि सर्वांश्च लोकांश्च महेन्द्र बलमाप्नुहि।
एवं संस्तूयमानश्च सोऽवर्धत शनै: शनै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महेन्द्र! तुम बल प्राप्त करो और समस्त लोकों की रक्षा करो।’ इस प्रकार स्तुति करने पर देवराज इन्द्र धीरे-धीरे बढ़ने लगे॥18॥
 
Mahendra! May you attain strength and protect all the worlds.' On being praised in this way, Devraj Indra gradually started growing. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)