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श्लोक 5.16.17  |
त्वं सर्वभूतेषु शरण्य ईडॺ-
स्त्वया समं विद्यते नेह भूतम्।
त्वया धार्यन्ते सर्वभूतानि शक्र
त्वं देवानां महिमानं चकर्थ॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| आप समस्त प्राणियों के द्वारा स्तुति के योग्य हैं और सबके आश्रय हैं। संसार में आपकी बराबरी करने वाला कोई दूसरा प्राणी नहीं है। हे शंकर! आप ही समस्त प्राणियों का पालन करते हैं और आपने ही देवताओं की महिमा बढ़ाई है॥ 17॥ |
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| ‘You are worthy of being praised by all beings and are the refuge of all. There is no other being in the world who can match you. O Shankara! You alone sustain all beings and you alone have increased the glory of the gods.॥ 17॥ |
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