श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.16.15 
शतक्रतो विवर्धस्व सर्वाञ्छत्रून् निषूदय।
उत्तिष्ठ शक्र सम्पश्य देवर्षींश्च समागतान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
शतक्रतो! आप अपने तेजस्वी रूप से आगे बढ़कर समस्त शत्रुओं का नाश कीजिए। इन्द्रदेव! उठकर यहाँ आये हुए ऋषियों को देखिए।॥15॥
 
‘Shatakrato! You advance with your radiant form and destroy all the enemies. Lord Indra! Get up and see the sages who have arrived here.॥ 15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd