श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.16.13 
गत्वा देवर्षिगन्धर्वै: सहितोऽथ बृहस्पति:।
पुराणै: कर्मभिर्देवं तुष्टाव बलसूदनम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब बृहस्पतिजी देवर्षियों और गन्धर्वों के साथ वहाँ गए और बलसूदन इन्द्र की उनके प्राचीन कर्मों का वर्णन करके उनकी स्तुति की॥13॥
 
Then Brihaspatiji went there along with Devarshis and Gandharvas and praised Balsudan Indra by describing his ancient deeds. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)