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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 16: बृहस्पतिद्वारा अग्नि और इन्द्रका स्तवन तथा बृहस्पति एवं लोकपालोंकी इन्द्रसे बातचीत
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श्लोक 11
श्लोक
5.16.11
अथ तत्रापि पद्मानि विचिन्वन् भरतर्षभ।
अपश्यत् स तु देवेन्द्रं बिसमध्यगतं स्थितम्॥ ११॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! उसमें भी कमलों के भीतर खोज करते हुए अग्निदेव ने कमल के तने में बैठे हुए देवेन्द्र को देखा॥11॥
Bharatshrestha! In that too, while searching inside the lotuses, Agnidev saw Devendra sitting in the stem of a lotus. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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