Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.159.4-5: मैं ईश्वर को परम शक्तिशाली मानता हूँ। उसके सामने प्रयत्न व्यर्थ हैं, क्योंकि मैं युद्ध के दोषों को भली-भाँति जानता हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि उन दोषों के कारण भयंकर विनाश हो सकता है। फिर भी, मैं न तो अपने पुत्र को, जो छल-कपट में निपुण है और छल-कपट के खेल खेलता है, रोक सकता हूँ, और न अपने हित के लिए कुछ कर सकता हूँ ॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 5.159: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिष्टमेव परं मन्ये पौरुषं चाप्यनर्थकम्।
यदहं बुद्ध्यमानोऽपि युद्धदोषान् क्षयोदयान्॥ ४॥
तथापि निकृतिप्रज्ञं पुत्रं दुर्द्यूतदेविनम्।
न शक्नोमि नियन्तुं वा कर्तुं वा हितमात्मन:॥ ५॥
अनुवाद
मैं ईश्वर को परम शक्तिशाली मानता हूँ। उसके सामने प्रयत्न व्यर्थ हैं, क्योंकि मैं युद्ध के दोषों को भली-भाँति जानता हूँ। मैं यह भी जानता हूँ कि उन दोषों के कारण भयंकर विनाश हो सकता है। फिर भी, मैं न तो अपने पुत्र को, जो छल-कपट में निपुण है और छल-कपट के खेल खेलता है, रोक सकता हूँ, और न अपने हित के लिए कुछ कर सकता हूँ ॥4-5॥
I believe that God is the most powerful. Efforts are futile in front of him because I know very well the flaws of war. I also understand that those flaws can lead to a terrible destruction. However, I can neither stop my son, who is an expert in the art of deception and plays deceitful games, nor can I do anything for my own benefit. ॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥