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mahabharat 5.158.9-10h: रुक्मी विजय नामक धनुष लेकर, जो मेघों की गर्जना के समान भयंकर शब्द करता था, सम्पूर्ण जगत को भयभीत करता हुआ पाण्डवों के पास आया॥9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.158.9-10h 
रुक्मी तु विजयं लब्ध्वा धनुर्मेघनिभस्वनम्॥ ९॥
विभीषयन्निव जगत् पाण्डवानभ्यवर्तत।
 
 
अनुवाद
रुक्मी विजय नामक धनुष लेकर, जो मेघों की गर्जना के समान भयंकर शब्द करता था, सम्पूर्ण जगत को भयभीत करता हुआ पाण्डवों के पास आया॥9 1/2॥
 
Rukmi, having got the bow named Vijaya which made a terrifying sound like the roar of the clouds, came to the Pandavas, frightening the entire world.॥9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)