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mahabharat 5.158.6: भगवान श्रीकृष्ण ने उस शार्ङ्गधनुष को धारण किया था, जिससे शत्रु सेना भयभीत हो गई थी और खाण्डव दहन के समय इन्द्रकुमार अर्जुन ने अग्निदेव से स्वयं गाण्डीवधनुष प्राप्त किया था ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.158.6 
धारयामास तत् कृष्ण: परसेनाभयावहम्।
गाण्डीवं पावकाल्लेभे खाण्डवे पाकशासनि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने उस शार्ङ्गधनुष को धारण किया था, जिससे शत्रु सेना भयभीत हो गई थी और खाण्डव दहन के समय इन्द्रकुमार अर्जुन ने अग्निदेव से स्वयं गाण्डीवधनुष प्राप्त किया था ॥6॥
 
Lord Shri Krishna wore that Sharngbow which frightened the enemy army and during the burning of Khandava, Indrakumar Arjun had personally received the Gandivabow from Agnidev. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)