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mahabharat 5.158.4: महाबाहु ने इन्द्र से विजय नामक धनुष प्राप्त किया था, जो गाण्डीव धनुष के समान तेजस्वी था। वह दिव्य गुणों से युक्त धनुष शार्ङ्गधनुष के समान था। 4॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.158.4 
यो माहेन्द्रं धनुर्लेभे तुल्यं गाण्डीवतेजसा।
शार्ङ्गेण च महाबाहु: सम्मितं दिव्यलक्षणम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु ने इन्द्र से विजय नामक धनुष प्राप्त किया था, जो गाण्डीव धनुष के समान तेजस्वी था। वह दिव्य गुणों से युक्त धनुष शार्ङ्गधनुष के समान था। 4॥
 
The great-armed one who had received from Lord Indra a bow named Vijay, which was as bright as the Gandiva bow. That bow, endowed with divine characteristics, resembled the Sharngbow. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)