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mahabharat 5.158.39: बलरामजी के तीर्थयात्रा करने और भीष्मकपुत्र रुक्मी के अपने नगर को चले जाने पर पाण्डव पुनः गुप्त मंत्रणा के लिए एकत्र हुए ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.158.39 
गते रामे तीर्थयात्रां भीष्मकस्य सुते तथा।
उपाविशन् पाण्डवेया मन्त्राय पुनरेव च॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
बलरामजी के तीर्थयात्रा करने और भीष्मकपुत्र रुक्मी के अपने नगर को चले जाने पर पाण्डव पुनः गुप्त मंत्रणा के लिए एकत्र हुए ॥39॥
 
After Balramji's pilgrimage and Bhishmak's son Rukmi left for his city, the Pandavas again met for secret advice. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)