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mahabharat 5.158.37: राजा रुक्मी ने दुर्योधन से मिलकर उससे भी यही बातें कहीं। तब दुर्योधन, जो स्वयं को वीर योद्धा मानता था, ने भी उसकी सहायता लेने से इनकार कर दिया। 37.   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.158.37 
तथैव चाभिगम्यैनमुवाच वसुधाधिप:।
प्रत्याख्यातश्च तेनापि स तदा शूरमानिना॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
राजा रुक्मी ने दुर्योधन से मिलकर उससे भी यही बातें कहीं। तब दुर्योधन, जो स्वयं को वीर योद्धा मानता था, ने भी उसकी सहायता लेने से इनकार कर दिया। 37.
 
King Rukmi met Duryodhan and said the same things to him. Then even Duryodhan, who considered himself a valiant warrior, refused to take his help. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)