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mahabharat 5.158.35: महाबाहो! मैं भयभीत नहीं हूँ और मुझे किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है। आप अपनी इच्छानुसार कहीं और जाएँ या यहीं रहें।॥35॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.158.35 
नास्मि भीतो महाबाहो सहायार्थश्च नास्ति मे।
यथाकामं यथायोगं गच्छ वान्यत्र तिष्ठ वा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! मैं भयभीत नहीं हूँ और मुझे किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है। आप अपनी इच्छानुसार कहीं और जाएँ या यहीं रहें।॥35॥
 
‘Mahabaho! I am not afraid and I do not need any help. You may go elsewhere or stay here as per your wish.’॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)